जयपुर की इलस्ट्रेटर सिमरन कौर ने चार देशों की भूली हुई रॉयल्टी कैसे वसूली

सिमरन कौर जयपुर के सी-स्कीम इलाके में एक छोटे स्टूडियो से काम करती हैं। वे एक फ्रीलांस इलस्ट्रेटर हैं जिनकी कृतियाँ — रंगीन पात्र, बच्चों की किताबों के चित्र, ब्रांड मैस्कट — दुनिया भर के प्रकाशकों, ब्रांडों और मोबाइल ऐप्स में दिखती हैं। सिमरन की कला सीमाओं को नहीं जानती। पर उनका हिसाब-किताब सीमाओं में उलझकर रह गया था।

कला जो बिकती है, पर पैसा जो छूट जाता है

सिमरन का काम सामान्य फ्रीलांस से अलग है। वे एक बार चित्र बनाती हैं और फिर उसे लाइसेंस करती हैं — यानी प्रकाशक या ब्रांड उसका उपयोग करने का अधिकार खरीदते हैं, और हर बिक्री या उपयोग पर सिमरन को रॉयल्टी मिलती है। यह आय एकमुश्त नहीं, बल्कि तिमाही या अर्धवार्षिक निपटान में आती है, और चार अलग-अलग देशों से:

"समस्या यह थी कि रॉयल्टी अपने-आप नहीं आती," सिमरन बताती हैं। "अनुबंध में लिखा होता है कि वे हर तिमाही रिपोर्ट और भुगतान भेजेंगे, पर सच यह है कि अगर आप याद न दिलाएँ, तो आधे लोग भूल जाते हैं या टाल देते हैं। और जब चार देश, चार मुद्राएँ और अलग-अलग निपटान-चक्र हों, तो मुझे खुद याद नहीं रहता कि किससे, कब, कितना बकाया है।"

स्केचबुक में दबा हिसाब

सालों तक सिमरन का "रॉयल्टी सिस्टम" एक स्केचबुक के आख़िरी पन्नों में पेंसिल से लिखे नोट थे। एक तिमाही वे US ब्रांड को याद दिलातीं, अगली बार भूल जातीं। जापान वाली ऐप दो साल से रिपोर्ट भेज रही थी पर सिमरन ने कभी मिलान नहीं किया कि जो भेजा वह सही है या नहीं। "मेरी कला हर जगह थी," वे कहती हैं, "पर मेरा पैसा कहीं खो रहा था।"

हिसाब का दिन

एक दिन सिमरन ने अपनी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट मित्र के साथ बैठकर पूरा हिसाब लगाने की कोशिश की। दोनों ने अनुबंध, ईमेल और बैंक स्टेटमेंट खंगाले। जो निकला वह चौंकाने वाला था — चारों स्रोतों से मिलाकर लगभग ₹28 लाख की रॉयल्टी या तो कभी माँगी नहीं गई थी या आधी-अधूरी आई थी। US ब्रांड के दो अर्धवार्षिक निपटान पूरे छूट गए थे। जापान की ऐप ने एक तिमाही में कम भुगतान किया था जिसका सिमरन को पता ही नहीं चला।

"मेरी मित्र ने कहा, 'तुम्हें एक ऐसा सिस्टम चाहिए जो मुद्रा भी समझे और याद भी दिलाए।' उसी ने InvoiceFlow सुझाया।" सिमरन ने उसी हफ़्ते ऐप डाउनलोड किया और अपना व्यवसाय प्रोफ़ाइल बनाया — "सिमरन कौर इलस्ट्रेशन", अपना लोगो, GSTIN, सी-स्कीम का पता।

मल्टी-करेंसी: चार मुद्राएँ, एक जगह

सिमरन के लिए सबसे क़ीमती सुविधा थी मल्टी-करेंसी चालान। अब वे हर क्लाइंट को उसकी अपनी मुद्रा में चालान भेज सकती थीं — US ब्रांड को USD में, UK प्रकाशक को GBP में, जापान की ऐप को JPY में, और दिल्ली के प्रकाशक को ₹ में। चालान बनाते समय ऐप उन्हें विनिमय दर की लाइव झलक दिखाता, और चालान जारी करते ही उस दिन की दर लॉक कर देता। जब भुगतान दो महीने बाद आता और तब तक रुपया-डॉलर दर बदल चुकी होती, तब भी चालान पर मूल दर दर्ज रहती — ठीक वैसे जैसे निर्यात लेखांकन में चाहिए।

निर्यात सेवाओं पर एक और बात ज़रूरी थी — सिमरन ने LUT (Letter of Undertaking) के तहत IGST के बिना निर्यात चुना था, इसलिए उनके अंतरराष्ट्रीय चालान शून्य-रेटेड थे। ऐप में उन्होंने इसे प्रीसेट किया ताकि हर विदेशी चालान पर सही नोट छपे। दिल्ली के भारतीय प्रकाशक के लिए, चूँकि यह राज्य-बाहर (राजस्थान से दिल्ली) था, चालान पर IGST 18% लगता — और ऐप इसे अपने-आप संभालता।

रॉयल्टी ट्रैकिंग — भूलने का अंत

दूसरी क्रांतिकारी चीज़ थी हर रॉयल्टी-धारा को व्यवस्थित ट्रैक करना। सिमरन ने हर क्लाइंट के लिए एक दोहराने योग्य चालान उसके निपटान-चक्र के अनुसार सेट किया — US और UK के लिए हर छह महीने, भारत और जापान के लिए हर तिमाही। हर चक्र के पास आते ही InvoiceFlow उन्हें याद दिलाता, और सिमरन रॉयल्टी रिपोर्ट का मिलान करके चालान भेज देतीं। अब कोई निपटान चुपचाप नहीं छूटता।

पुरानी ₹28 लाख की वसूली

नए सिस्टम के साथ सिमरन ने पुरानी बकाया का सामना किया। उन्होंने हर छूटे निपटान के लिए एक साफ़, पेशेवर चालान बनाया — सही मुद्रा में, अनुबंध-संदर्भ और लाइसेंस-अवधि के साथ — और हर क्लाइंट को भेजा। US ब्रांड, जिसने दो निपटान छोड़े थे, ने माफ़ी के साथ तीन हफ़्ते में USD भुगतान कर दिया। UK प्रकाशक ने पुरानी रिपोर्ट निकालकर मिलान किया और बकाया चुकाया। जापान की ऐप ने कम-भुगतान की भरपाई की।

"पेशेवर चालान का असर अद्भुत था," सिमरन कहती हैं। "जब तक मैं ईमेल में 'याद दिला रही हूँ, शायद कुछ बकाया है' लिखती थी, कोई गंभीरता से नहीं लेता था। जब अनुबंध-संदर्भ और सटीक मुद्रा के साथ औपचारिक चालान गया, हर किसी ने जल्दी जवाब दिया।" आठ महीने में लगभग पूरी ₹28 लाख वसूल हो गई।

कॉपीराइट लाइसेंस अनुबंध भी साफ़

इस पूरी प्रक्रिया में सिमरन ने एक और आदत बनाई — हर नए लाइसेंस के लिए स्पष्ट कॉपीराइट लाइसेंस अनुबंध। उन्होंने अपने चालान-टेम्पलेट में लाइसेंस की शर्तें — उपयोग का दायरा, अवधि, रॉयल्टी दर और निपटान-आवृत्ति — जोड़ दीं। हर चालान अब सिर्फ़ बिल नहीं, बल्कि लाइसेंस का रिकॉर्ड भी था। "मेरे चालान अब मेरे अधिकारों की रक्षा करते हैं," वे कहती हैं।

एक साल बाद

आज सिमरन की चारों रॉयल्टी-धाराएँ एक स्क्रीन पर साफ़ दिखती हैं — किससे कब कितना आना है, किस मुद्रा में, और पिछला निपटान कैसा रहा। पुरानी ₹28 लाख वसूल हो चुकी है, और अब कोई नया निपटान नहीं छूटता। इस स्थिरता ने सिमरन को नए अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट लेने का आत्मविश्वास दिया — एक कनाडा का प्रकाशक और एक जर्मन ऐप जुड़े हैं।

"मैं एक कलाकार हूँ, हिसाब-किताब वाली नहीं," सिमरन हँसती हैं। "पर अब मुझे हिसाब वाली बनने की ज़रूरत नहीं — ऐप मेरी मुद्राएँ और मेरी रॉयल्टी दोनों संभालता है। मैं बस चित्र बनाती हूँ, और पैसा अब खोता नहीं।"

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